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जैविक खेती और मृदा एवं जल परीक्षण के प्रति जागरुकता

कृषि हमारे देश की रीढ़ है, और यह हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा है। समय के साथ कृषि पद्धतियों में बदलाव आया है, और आधुनिकता के साथ-साथ पारंपरिक ज्ञान का भी समावेश हुआ है। आजकल रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग के कारण मृदा की उर्वरता में कमी, जलवायु परिवर्तन, और पर्यावरणीय असंतुलन जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो रही हैं। इन समस्याओं से निपटने के लिए जैविक खेती एक प्रभावी समाधान के रूप में उभर कर सामने आई है।

जैविक खेती एक ऐसी कृषि पद्धति है जिसमें रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग नहीं किया जाता। इसके बजाय, प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करके मृदा की उर्वरता बढ़ाई जाती है और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखा जाता है। इसमें गोबर की खाद, जीवामृत, बायोफर्टिलाइजर्स, और मल्चिंग जैसी विधियों का उपयोग किया जाता है। जैविक खेती से उत्पादित फसलें रासायनिक अवशेषों से मुक्त होती हैं, जो मानव स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होती हैं।

मृदा और जल परीक्षण भी जैविक खेती के महत्वपूर्ण अंग हैं। मृदा परीक्षण से मृदा की उर्वरता, पीएच स्तर, और पोषक तत्वों की स्थिति का पता चलता है, जिससे उचित उर्वरक और पोषक तत्वों का चयन किया जा सकता है। जल परीक्षण से सिंचाई जल की गुणवत्ता का मूल्यांकन किया जाता है, जिससे जल की उपयुक्तता और फसल की वृद्धि पर इसके प्रभाव का निर्धारण किया जा सकता है।

इन पहलुओं को ध्यान में रखते हुए, कृषि संकाय, टांटिया विश्वविद्यालय, सूर्योदय जैविक कृषि कम्पनी खोथांवाली, और सटनोवा लाइफ साइंस प्राइवेट लिमिटेड के संयुक्त तत्वावधान में एक किसान संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। यह संगोष्ठी दिनांक 09 मई 2025 को टांटिया विश्वविद्यालय, श्रीगंगानगर में आयोजित होगी।

इस संगोष्ठी में कृषि विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, और अनुभवी किसान जैविक खेती, मृदा और जल परीक्षण, और अन्य संबंधित विषयों पर अपने अनुभव और ज्ञान साझा करेंगे। किसानों को जैविक खेती की विधियों, मृदा और जल परीक्षण की प्रक्रियाओं, और इनसे संबंधित लाभों के बारे में जानकारी प्रदान की जाएगी। साथ ही, किसानों के प्रश्नों का समाधान भी किया जाएगा।

हम सभी किसानों से निवेदन करते हैं कि वे इस संगोष्ठी में भाग लें और जैविक खेती के लाभों को समझें। यह अवसर आपके कृषि कार्यों को और अधिक लाभकारी और पर्यावरण के अनुकूल बनाने में सहायक सिद्ध होगा

Author

Dr. US Shekhawat

We are pleased to announce that the Faculty of Agriculture at Tantia University offers a Soil and Water Testing Laboratory to support optimal agricultural productivity and sustainability. Accurate testing helps determine soil nutrient levels and water suitability, guiding effective fertilizer use, improving yields, and promoting environmental safety. Our reliable and affordable services are available to farmers, agri-entrepreneurs, and extension workers. Our expert faculty and trained technicians are here to assist in interpreting results and providing crop-specific guidance. We invite you to make the most of this facility as we work together toward a more efficient and prosperous agricultural future.